जेनर डायोड वोल्टेज नियंत्रक- जेनर डायोड का प्रयोग

परिचय

 जेनर डायोड वोल्टेज नियंत्रक के रूप में वोल्टेज को विनियमित करने के लिए किया जाता है। यह एक विशेष  p-n संधि डायोड है जो उत्क्रम अभिनति मोड में काम करता है। इसका एक विशेष भंजक विभव(breakdown voltage) VZ  होता है। यह डायोड भारी मात्रा में डोप किया जाता है। यह अनियमित निवेशी वोल्टेज को एक निश्चित वोल्टेज में बनाता है। इसका परिपथ नीचे दिया गया है:

जेनर डायोड वोल्टेज नियंत्रक का परिपथ

जेनर डायोड वोल्टेज नियंत्रक
चित्र 1: जेनर डायोड वोल्टेज नियंत्रक

दिए गए जेनर डायोड वोल्टेज नियंत्रक परिपथ में, हमारे पास है

Vi या Vin: निवेशी वोल्टेज (input voltage)

VR : श्रेंणीबद्ध प्रतिरोध RS के पार वोल्टेज

VL: लोड प्रतिरोध RL के पार वोल्टेज

तथा इस परिपथ मे हमेसा Vo = VL होता है

VZ: जेनर डायोड वोल्टेज या भंजक विभव (zener diode breakdown voltage)

जेनर डायोड वोल्टेज नियंत्रक का परिपथ(Circuit) कैसे काम करता ?

जैसा ही हम परिपथ में Vin वोल्टता(विभव) लागू करते हैं, तो निवेशी वोल्टता(input voltage) की ध्रुवीयता के आधार पर जेनर डायोड उत्क्रम अभिनति(reverse bias) या अग्र अभिनति(forward bias) में होता है।

परिपथ के ठीक से काम करने के लिए, लागू वोल्टता Vin की ध्रुवीयता ऐसी होनी चाहिए है जिससे जेनर डायोड उत्क्रम अभिनति(reverse bias) मे चला जाये और वोल्टता Vin की मात्रा Vz वोल्टता से अधिक होनी चाहिए है।

ऐसे मामले में निर्गत वोल्टता VL , जेनर डायोड वोल्टता Vz के बराबर होती है, जबतक निवेशी वोल्टता Vz से अधिक होती है। एवंम उतार-चढ़ाव वाली अतिरिक्त वोल्टता(विभव) को श्रृंखला प्रतिरोध में VR के रूप में आती है। यदि Vin को बढ़ाया जाता है, तो निर्गत वोल्टता Vo =  Vz हो जाती है और यह लोड धारा IL में वृद्धि का कारण बनती है। इसके कारण, कुल धारा I का मान बढ़ जाता है तथा श्रृंखला प्रतिरोध RS के पार सभी अतिरिक्त वोल्टता ड्रॉप होती है।

हम 3 अलग-अलग तरीकों से जेनर डायोड वोल्टेज नियंत्रक परिपथ का विश्लेषण कर सकते हैं: 

01: जब निवेशी वोल्टता Vin और प्रतिरोध RS निश्चित हो जेनर डायोड वोल्टेज नियंत्रक परिपथ मे

 यह जानने के लिए कि जेनर डायोड सक्रिय अवस्था में है या नहीं, हमें डायोड के पार वोल्टता  का पता लगाना होगा, जोकि

V = VO = (RL x Vin) / (RS + RL)

V जेनर डायोड के पार वोल्टता है।

यदि V < VZ तो जेनर डायोड ऑफ स्टेट में है और परिपथ बन जाएगा

जेनर डायोड वोल्टेज नियंत्रक
चित्र 2: जेनर डायोड वोल्टेज नियंत्रक

निर्गत वोल्टता VO = VL = (RL x Vin) / (RS + RL) होगी

यदि V> = VZ तो जेनर डायोड सक्रिय अवस्था में होगा

VO = VL = VZ और

VR = Vin – VZ,

IR = VR / RS,

IL = VL / RL,

IZ = IR – IL

PZ = IZ x VZ

02: यदि निवेशी वोल्टता Vin का मान निश्चित हो और लोड प्रतिरोध RL का मान अस्थायी हो 

लोड प्रतिरोध RL का एक न्यूनतम मान होता है जिसपे जेनर डायोड के पार वोल्टता V, जोकि VZ से अधिक या बराबर होती है। तो हम कह सकते है कि भंजन विभव VZ, लोड प्रतिरोध RL के मान को सीमित करता है।

RL का न्यूनतम मान ज्ञात करने के लिए वोल्टता VL , VZ के बराबर होनी चाहिए।

चूंकि VL = VZ,

और हम जानते हैं कि, VZ = ( RL x Vin) / ( RS + RL )

इसका अर्थ है कि, RL का न्यूनतम मान है

                                                R(L)min = (RS x VZ) / (Vin – VZ)

R (L)min से अधिक या उसके बराबर कोई भी लोड प्रतिरोध मान सुनिश्चित करेगा कि डायोड सक्रिय अवस्था में है। यदि हमारे पास लोड प्रतिरोध का न्यूनतम मान है तो लोड धारा IL अधिकतम होगा,

IL(max) = VL / R (L)min

जब हमारे पास अधिकतम लोड धारा होती है, तो जेनर डायोड धारा IZ न्यूनतम होगी।

03: जब हमारे पास लोड प्रतिरोध RL का निश्चित मान हो तथा निवेशी वोल्टता Vin का मान अस्थायी हो

 इस मामले में हमारे पास निवेशी वोल्टता Vin का न्यूनतम मान होता है जिसपर जेनर डायोड वोल्टता नियामक के रूप में काम करता है।

 जेनर डायोड के पार वोल्टता को हम V से दर्शाते है, जिसका मान होगा

V = VL = (RL x Vin) / (RS + RL )

इसका अर्थ है Vin(min) = ( (RS + RL ) x VZ) / RL

Vin(min) जोकि Vin का न्यूनतम मान है।

तथा इसके लिए लोड प्रतिरोध RL का मान पर्याप्त होना चाहिए और यह निवेशी वोल्टता के अधिकतम मूल्य को सीमित भी करता है,

Vin(max) = VR(max) + VZ

Vin(max) = ( IR(max) x R ) + VZ

Vin(max), जोकि Vin का अधिकतम मान है।

VR(max) जोकि VR का अधिकतम मान है।

IR(max) जोकि IR  का अधिकतम मान है।

1 thought on “जेनर डायोड वोल्टेज नियंत्रक- जेनर डायोड का प्रयोग”

  1. Pingback: RC Phase Shift Oscillator

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *